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Tuesday, December 6, 2011

मेरी चाह


जब तुम मिले तो ऐसा लगा जैसे बरसों का खोया यार मिल गया .
आने से तुम्हारे सूने पड़े जीवन में बहार का मौसम  छा गया .

       अधूरी पडी उम्मीदों को एक राह का सहारा मिल गया
       मिलकर दिन गुजरे महीने गुजरे  गुजर   गए साल .

जिन्होंने मेरे सपनों को अपने सपनो से जोड़कर एक मुकाम दे दिया
ना चाहकर भी हमसे नाता जोड़ लिया अपनी राहों को हमारी राहों से जोड़ लिया  .

    ठोकर खा –खा कर अब और जीने की आस ना रही
    दिल पर अब और जख्म खाने की जगह ही ना रही .

मेरी खुशियों को अपनी खुशियों में ढाल लिया
मिलकर मुझसे मुझे जीना सिखा दिया  .
              काश मेरी खुशी किस में है यह भी जान लिया होता  
              गैरों ने जो जख्म दिया था वो तुमने तो ना दिया होता .
जिन खुशियों  को देने की खातिर  तुम हम से दूर हुए
दुनियां से लड़ –लड़कर थककर चूर हुए .

एक बार  जान  तो लिया होता आखिर मेरी चाह क्या है
दिल की हर धडकन में दिख जाता उसमें सिर्फ नाम तेरा है .

Monday, February 14, 2011

तेरी महफिल

तेरे साथ हम तेरी महफिल तक जा पहुँचे,
दिल का गम छिपाकर तेरी महफिल में जा बैठे।
     दुनिया की नजरों से बचकर तेरे साथ हम मैखाने में जा बैठे,
     मय के दो प्यालों के साथ हमें वहाँ से लौटना पड़ा
     तेरे साथ तेरी महफिल में हमें बैठना पड़ा ।

साथ तेरा पाकर हमने लुफ्त खूब उठाया 
रात गहरी होने लगी तनहाइयाँ बढ़ने लगी
हमें साथ तेरे खाली हाथ लौटना पड़ा
तेरे साथ तेरी महफिल में हमें बैठना पड़ा ।

  मैखाने में अगर हमें देख ले कोई ,यूँ तीखी नज़रों से
  अब तो अंगुलियाँ जमाने की हम पर उठने लगी
  तेरी खातिर हमें वहाँ से यूँ खाली हाथ लौटना पड़ा
  तेरे साथ तेरी महफिल में हमें बैठना पड़ा ।

महफिल चाँद सितारों सी सजी थी, चाँद अपनी जवानी में था
चेहरा न नजर आया यार का ,हमें खाली हाथ लौटना पड़ा
तेरे साथ तेरी महफिल में हमें बैठना पड़ा ।

Thursday, September 30, 2010

बन्धन

घर के बन्धन तोड़कर , निकले इस मोड़ पर
देखो इन दीवानों को , देखो इन मस्तानो को

                             घर के बंधन तोड़कर , प्यार का बंधन जोड़कर
                              मस्ताने निकल आए आज अपनी राह पर .
न घर का पता न मंजिल का
ये घर से बेगाने होकर चले आए .
                             
                          घर के बन्धन तोड़कर , निकले इस मोड़ पर

                          देखो इन दीवानों को , देखो इन मस्तानो को

लगी जो एक लगन , खिल गए देखो चमन ,
आज  झूमे इनकी मस्ती में,धरती और गगन
अरे देखो इन दीवानों को ,देखो इन मस्तानों को

                                 हंसते हुए दिलों को आंसूं देकर आओगे?
                                 बहते हुए  आंसुओं पर क्या तुम अपना घर बसाओगे .?
                                 टूटे दिलों कि आहें लेकर क्या तुम ख़ुशी से जी पाओगे?

घर के बन्धन तोड़कर , निकले इस मोड़ पर
देखो इन दीवानों को , देखो इन मस्तानो को


                             माना कि जीवन में हर चीज़ पानी ज़रूरी है
                            जिसको तुमने चाह ,उसकी खातिर  हो गए दीवाने ,

राह हो जीने की या पढने की  या हो सच्चाई पर चलने की
जीवन की राह पर तुम  हार न जाना ,सच्चाई की  राह से कभी दूर न जाना .
                         
                              घर के बन्धन तोड़कर , निकले इस मोड़ पर
                               देखो इन दीवानों को , देखो इन मस्तानो को

Monday, September 13, 2010

तितली रानी

       तितली रानी तितली रानी
       सुंदर -सुंदर पंख तुम्हारे
       इतने सुंदर पंख लाई कहाँ से ,


जब तुम फूलों पर मंडराती हो 
फूलों का रस ले जाती हो

       चुपके से तुम मेरी बगीया के फूलों का रस ले जाती हो
       फूलों के रस का क्या तुम अपने घर पर  शहद बनती हो,

होते पंख अगर मुझको भी
मैं भी फूलों पर संग तुम्हारे मंडराता
                                     लेकर फूलों से सुन्दर -सुंदर रंग
                                    मैं भी अपने सपनों को खूब सजाता

तितली रानी तितली रानी
फूल -फूल पर तुम मंडराती हो ,

Thursday, September 9, 2010

मोर


     
देखो मोर नाच रहा है
पंखों को खोल रहा है
        नाच इसका सबको भाता
       जब यह पंखों की छतरी  फैलाता

   

          काले -काले बदल इसको भाते
          देख इन्हे यह पिहू -पिहू का गीत सुनाता



सुनकर इसके गीतों को
  बरखा रानी आती मस्ती में

Monday, September 6, 2010

मैं बड़ा हो गया हूँ

मैं तुम्हें याद आता हूँ ,
जब हम साथ नहीं होते.
मैं बड़ा हो रहा हूँ इतनी जल्दी
देखो तो ज़रा मैं कितना बड़ा हो गया हूँ .
       पकड़कर  हाथ तुम्हारा चलना सीखा
      लो आज मैं दौड़ रहा हूँ
      जबसे मैने चलना सीखा ,
      अब तक बहुत बदल गया हूँ .
साल महीने गुजर  गए
देखो मैं बड़ा हो गया
देखोगे जब तुम मुझको
सोचोगे  यह कब हुआ .
     दीवार पर टंगी मेरी तस्वीर है
     एक नज़र उसे देख लेना
    देखकर  तस्वीर तुम्हे याद मेरी आएगी
    जब मैं छोटा था , तुम्हारी गोदी मैं सोता था .

Friday, March 5, 2010

वो इन्तजार मिला है।

न चैन मिलता है न करार
तेरे इन्तजार में तड़प रहा हूँ,
चाहा है जिस दिन से तुझे
मिलने को तड़प रहा हूँ।

राह में जिसकी पलके बिछाए बैठे हैं
हर पल दिल को थामें बैठे हैं,
उनके ख्यालों को दिल ले लगाए बैठे हैं
ख्यालों के जन्नत में जिन्हें छिपाए रखते हैं।

दिल पर जिसका नाम लिखा वो यार तुम हो
हर लम्हा जिसका ख्याल रहता है वो प्यार तुम हो
आँखों के सामने जिसका चेहरा रहता है वो नजर तुम हो
आज उसका साथ मिला है वो एहसास तुम हो।

कहनी थी जो दिल की बात वो तुम ने पढ ली नजरों से
तन्हाई की गलियों में जिसे खोजा करता हूँ वो यार तुम हो
जिसके आने के इन्तजार में हम बैठे थे वो तुम हो।
तेरे प्यार में करते रहे अब तक ,वो इन्तजार मिला है।

Friday, November 6, 2009

जब भी मैंने जीना चाहा

जब भी मैंने जीना चाहा ,मौत का गम डरा गया
जब भी पाना चाहा साथ तेरा ,जुदाई का गम डरा गया
अब तो ऊब गया हूँ यूँ डर-डर कर जीने से
जी में आया तोड़कर सारे बंधन उड़ जाऊँ नील गगन में।

जागी हैं मन में एक नई आशा
जागा है जीने का नया भरोसा
बनकर पंछी जा बैठूँ उस शान्ति वन में
जहाँ मन में रहे न कोई आशा और अभिलाषा
जब भी कुछ पाना चाहा ,गम का दर्द डराकर चला गया
जब भी मैंने जीना चाहा ,मौत का गम डरा गया।

लगाकर दिल किसी से मन में जागी एक नई उमंग
न जाने क्यों दिल धड़कता है लेकर उनका नाम
अब पाना उनको जीवन का है लक्ष्य मेरा
जब पहुँचे मंज़िल पर तो उनके धोखे ने हिला दिया।
जीवन की राह पर वो छोड़ गए साथ पुराना
जब भी मैंने जीना चाहा ,मौत का गम डरा गया।


लाख भुलाना चाहा उनको लेकिन भुला न पाए
देकर अपनी यादों की आहुती भी उनको भुला न पाए
जब उनको चाहा था अपनाना वो मझधार में छोड़ गए साथ पुराना
जब भी मैंने हँसना चाहा उनका चेहरा रुला गया
जब भी मैंने जीना चाहा मौत का गम डरा गया।

Thursday, October 29, 2009

माँ






माँ तुझे सलाम तेरे जज्बे को सलाम
देकर अपनी साँसें तूने मुझको जीवन दिया  है
तेरी आँखों से ही तो मैने देखी दुनिया सारी
देकर जीवन की साँसे तूने हम पर किया उपकार
माँ तुझे सलाम तेरे जज्बे को सलाम।





    अगर न होती तुम तो मुझको संसार में लाता कौन
    अगर न होती तुम तो मुझको जीवन देता कौन
    अगर न होती तुम तो संसार को बसाता कौन
    ईश्व पहुँच नहीं सकता हर जगह इसलिए उसने बनाया तुमको
 




        माँ तुझे सलाम तेरे जज्बे कोसलाम।                                                                 
खुद भूखी रहकर मेरा पेट सदा ही भरती हो
खुद धूप में नंगे पाँव चलकर मुझे गोद में उठा ले जाती हो
आए कोई संकट मुझपर तुम मेरी ढाल बन जाती हो
मेरी रक्षा की खतिर तुम बडे-बड़ों से लड़ने से भी नहीं घबराती हो
माँ तुझे सलाम तेरे जज्बे को सलाम।





मेरी खुशियों की खातिर तुमने अपनी खुशियों का दिया है बलिदान
माँ तू ममता की है मूरत तुझमें ही बसता है भगवान
तेरे बिना इस जग में जीना नही तुझ बिन जीवन की कोई आस नहीं
हे माँ तुझे सलाम तेरे जज्बे को सलाम ।


Tuesday, October 27, 2009

जालिम दुनिया

ये जालिम दुनिया हमें चाहे या न चाहे
हम तो चाहेंगे तुम्हें  हर दिन हर पल
ये दुनिया बड़ी जालिम है दिल तोड़कर हँसती है
मतलब पड़े तो दिल जोड़ लेते हैं लोग
मतलब निकल गया तो साथ छोड़ देते हैं लोग
दिल को एक खिलौना बनाकर खेल लेते हैं लोग।
      दिल की हर धड़कन तेरे लिए धड़कती है
      जीवन के हर मोड़ पर साथ तेरा ढूँढती है
      जब भी तुम दिल से मुझे पुकारोगे,पास सदा मुझे पाओगे
      जीवन की हर राह पर याद मैं तुम्हें आऊँगा
         ये जालिम दुनिया हमें चाहे न चाहे
         हम तो चाहेंगे तुम्हें हर दिन हर पल     ।
तडप उठोगे जब याद हमारी आएगी
ढूँढोगे तुम हमें जब हम दूर चले जाएंगे
तन से भले ही दूर हो जाएं पल दिल तो तुम्हारे पास ही होगा
तेरे दिल की धड़कनों मे बसकर साथ तेरा हम पाएंगे
जब कभी भी ये हाथ दुआ को उठेंगे
तेरी सलामती ,तेरी खुशी के लिए सदा दुआ करेंगे
 ये जालिम दुनिया हमें चाहे न चाहे
 हम तो चाहेंगे तुम्हें हर दिन हर पल।

कर्मवीर बन

कर्मवीर बन ए इन्सान
कर्मभीरु न बन ए इन्सान।

    जो कर्मवीर है वही भाग्यवान है
    जो कर्महीन है वह भाग्यहीन है।

कर्म ही भाग्य का निर्माता है
कर्म के बल से तू पहाड़ों को भी झुका दे
सच्चाई की राह पर तू चलता जा ।

    लाख बाधाएँ आए राह में
    तू अपना लक्ष्य साधे चल
    देख बाधाओं को तू अपना लक्ष्य छोड़ न देना
    सच्चाई की राह तो तू छोड़ न देना।

मंजिल उसे ही मिलती है जो अपनी राह बनाता है
न सोच कि राह में क्या मिलेगा तुझे
मन में अपने मंजिल पाने की ललक जगाले तू
कर्मवीर बनकर अपनी मंजिल को पा ले तू।।

Wednesday, October 21, 2009

तेरा साथ

तुझसे मिलने का मैं हर पल ढूँढू रोज नया बहाना।
हर शाम तेरे साथ गुजारने का मैं नित ढूँढूं नया बहाना।
पास अपने रोकने का मैं नित ढूँढू नया बहाना।
जो शाम मेरी तुझसे मिले बिना गुजर जाए उस रात मुझे नींद भला कैसे आए।
तेरे आने की नित राह यूँ निहारु जैसे प्यासा मयूर बदरा को।
काँटों भरी राह पर भी मैं ढूँढू तुझसे मिलने का नया बहाना
दुनिया को दिखाने को अब मैं हँसने का बहाना ढूँढता हूँ।
तेरी याद भुलाने के लिए अब मैं ढूँढू कोई नया बहाना।।

बेरहम दुनियाँ में अब मैं जीने का सहारा ढूँढता हूँ
अब तो तेरी याद भुलाने को मैं मरने का बहाना ढूँढता हूँ
मरकर भी किसी मोड़ पर अगर तू मिल जाए
तुझे देखकर मैं खुशी-खुशी इस जहान से विदा हो जाऊँ।।

Monday, October 19, 2009

तुम निर्बल हो नहीं

लाज का पर्दा छोड़ दो शर्म का घुंघट छोड़ दो
अपने भाग्य को कर्म पथ पर मोड़ दो
दिखा दो समाज को कि तुम किसी से कम नहीं।
रानी लक्ष्मीबाई की तरह तुम भी अपनी उन्नती की जंग का ऐलान कर दो
समाज में अपना मुकाम अभी भी तुम्हें है पाना ।

लाज शर्म को छोड़ दो चार दिवारी के बंधन को तोड़ दो,
दिखा दो कि तुम निर्बल हो नहीं ।
नारी तेरी महानता इस जग ने है जानी
तुझमें ही है दुर्गा है तुझ में ही काली
तेरे आंचल की छांव में है पलती दुनिया सारी।

Tuesday, October 6, 2009

"सब मिलकर पेड़ लगाएँ"

आओ साथी सब मिलकर पेड़ लगाएँ, बड़े प्यार से पेड़ लगाएँ

पेड़ों की हरियाली से इस जग को नहलाएँ
आओ साथी सब मिलकर पेड़ लगाएँ।।


पेड़ों की इस हरियाली से प्रदूषण को दूर भगाएंगे

प्रदूषण को दूर भगाकर नया संसार हम बनाएंगे

हरियाली की शोभा चारों दिशाओं में फैलाएंगे

भारत की इस पावन भूमि को हम स्वर्ग बनाएंगे

आओ साथी सब मिलकर पेड़ लगाएँ, बड़े प्यार से पेड़ लगाएँ।।


आनेवाली नई पीढी को तुम हरा -भरा संसार देते जाना

अगर न होंगे पेड़ और पौधे तो सोचो क्या होगा इस धरती का

अगर न होंगे पेड़ इस धरती पर तो हो जाएगी यह शमशान

शमशान न होने देंगे इस धरती को , रहते अपनी जान के

आओ साथी सब मिलकर पेड़ लगाएँ, बड़े प्यार से पेड़ लगाएँ।।


यदि लगाओगे तुम एक-एक पौधा तो धरती पर बढ़जाएगी हरियाली

पेड़ लगाकर ला सकते हैं हम प्रकृति संतुलन को वापस

वैसे तो एक पेड़ भी हरता है प्रकृति का प्रदूषण सारा

लेकिन हिलमिल कर रहने से और भी बढ़ जाएगी हरियाली

आओ हम सब मिलकर यह प्रण ले कि जीवन के इस आधार को मिटने न देंगे।

हरी -भरी धरती पर ही होंगी खुशहाली चारो ओर

कण-कण देगा तुम आशीश ,जीवन की खुशहाली में

पेड़ों की हरियाली से ही जीवन की खुशहाली होगी

आओ हम सब मिलकर यह प्रण ले कि जीवन के इस आधार को मिटने न देंगे।

Monday, October 5, 2009

हिंद देश के निवासियो

हिंद देश के निवासियो सुनो ज़रा


क्या कह रही है माँ वसुंधरा पुकार कर।

देश है बांटा , जात है बांटी

बांट लिया धर्म और ईमान को

मत बांटो अपने आप को धरम और ईमान के नाम पर

कहता नहीं धर्म कोई भी कि बांटो तुम इन्सानों को

सभी धर्मों का एक की सार,मानव का हो मानव से प्यार

मत बांटो इन्सानों को धर्म और ईमान के नाम पर।।


                न रोको जीवन की इस पावन धारा को

                मानव सेवा ही है माधव सेवा समझो इस बात को

                सरिता करती कभी न भेद अपना जल देने में

               सूरज करता कभी न भेद अपनी रोशनी देने में

                न किया कभी चाँद ने भेद चाँदनी देने में

                फिर क्यों करते हो तुम भेद इन्सानों में

               मत बांटो इन्सानों को धर्म और ईमान के नाम पर।।


न रंगो माँ वसुंधरा के तन को उसी के सपूतों के लहु से

बेटे चाहे कितने भी हो सब होते हैं माँ को प्यारे

करती कभी न भेद माता अपने बच्चों में

फिर क्यों करते हो तुम भेद इन्सानों में

मत बांटो इन्सानों को धर्म और ईमान के नाम पर।।


              हिन्दु, हो या मुस्लिम, हो या हो सिख, ईसाई

              लहु-लहु में कोई भेद नहीं सब के सब है भारतवासी

             भारतीयता हो हमारी पहचान भारत माता है हमारी शान

             हिंद देश के निवासियो सुनों जरा

             क्या कह रही है माँ वसुंधरा पुकार कर।।

Thursday, October 1, 2009

भारत देश हमारा

सबका प्यारा सबसे न्यारा भारत देश हमारा
मस्तक हिमराज विराजे इसकी शान निराली है।
कण-कण में है सोना , खेतों में हरियाली है
भारत देश है सबका प्यारा ,इसकी शान निराली है।।
हरा भरा है आँगन इसका,घर-घर में खुशहाली है
जन्में इसकी मिट्टी में गाँधी ,नेहरू और सुभाष हैं।
जन्मी इसी मिट्टी में लक्ष्मीबाई महान हैं
देकर अपनी जान की बाजी , दी हमको आजादी महान है।
सबका प्यारा सबसे न्यारा भारत देश हमारा।।
भिन्न -भिन्न है भाषा इसकी , भिन्न- भिन्न हैं बोली
भिन्न -भिन्न है जाति धरम पर सबकी एक ही अभिलाषा है
भिन्नता में एकता ही जिसकी पहचान है
एक ही माटी एक ही गुलशन क्यारी जुदा -जुदा है
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान महान है,हम इसकी संतान हैं।।
जन्म लिया है इस मिट्टी में ,पले बड़े हुए हैं इसकी गोद में
आंच न आने देंगे इसकी शान पर,रहते अपनी जान के
जान भले ही चली जाए, पर जाने न देंगे इसकी शान को
ऊँच-नीच और जात -पांत का भेद मिटाकर रखेंगे इसकी शान को
सबका प्यारा सबसे न्यारा भारत देश हमारा।।

Wednesday, September 30, 2009

वक्त

कहते हैं हर मर्ज की दवा कर देता है वक्त
एक बार गए लोगों को भुला देता है वक्त ।
जब दोस्ती की कोई भूली दास्तान सुनाएगा वक्त
हमें भी कोई अपना शक्श याद आएगा उस वक्त
जीवन के हर गम को हम भूल जाएंगे
जब दिल को याद तुम्हारी आएगी
वक्त से हाल तुम्हारा जान लेंगे।
दिल की यादों में तुम्हें बसाकर रखा है
जब -जब याद तुम्हारी आएगी
छूकर तुम्हें आई हवा से हाल तुम्हारा जान लेंगे
पाकर स्पर्श उस हवा का
तुम्हारे पास हेने को महसूस करेंगे।
जब साथ गुजारे पल जब याद आएं
तो आँखे अपनी बंद कर याद मुझे कर लेना
हर सांस बनकर साथ तुम्हारे हो लुंगा
अगर इतना भी न कर सको तो
अपने होठों पर एक मुस्कान ला देना ।
तुम्हारी एक मुस्कराहट बनकर साथ तुम्हारे हो लुँगा।
मत सोचो कि साथ है कितने दिन का
साथ नहीं जीवन भर का ,न सही
जीवन साथ न गुजार सके तो क्या
इस पल को तो तुम्हारे साथ जी लेने दो।
अगर दे सकूं कोई मुस्कराहट तुम्हें जीवन में
जीवन का क्या भरोसा , आज यहाँ तो कल कहाँ
कल की बात को तुम कल में ही रहने दो
आज के वक्त को तो साथ जी लेने दो
कल न जाने ये वक्त कहाँ ले जाए
आज तो हँसकर जी लेने दो।

Tuesday, September 29, 2009

तेरे आने की खबर से

तेरे आने की खबर से दिल मेरा यूँ खिल जाए
जैसे सूनी पड़ी बगिया में बहार आ जाए।
दिल ने जिसे चाहा वो यार तुम हो
दिल की हर धड़कन में जो बसे वो तुम हो।
बीच मजधार में साथ छोड़ न देना ,
कभी तन्हा छोड़ न जाना।
तन्हा राहों पर मुँह मोड़ न लेना
बहार बनकर न रह सको न सही
पर तन्हा छोड़ न जाना।
साथ तेरा पाने को लड़ जाएं दुनिया से
तेरे प्यार के लिए काँटों पर चल जाएंगे।
तेरे प्यार के लिए दुनिया में जी लेंगे,
तेरी खुशी के लिए ए यार हम जुदाई का गम भी हँस कर पी लेंगे।
तेरी खुशी के लिए हम दुआ करेंगे
तू सदा खुश रहे ,तेरी खुशी को देखकर हम जी लेंगे।

दोस्ती

दोस्ती का दम भरने वालों सुनो ज़रा,
होती है क्या दोस्ती मुझे बताओ ज़रा।
सुना है दोस्त दोस्ती में जान दे देते हैं
दोस्ती वह नहीं जो दोस्तों की जान ले ले,
दोस्ती तो एक अहसास है जिसे देखकर महसूस किया जाता है।
दोस्ती वह भी नहीं जो मुस्कान देती है
मुस्कान का क्या ,वह तो बेवफा है,
एक पल होंटों पर आकर चली जाती है।
दोस्ती तो एक अरमान है
जो दिल से दिल मिलने की आस लगाए रहती है
अगर पाना है दोस्ती का गुलदस्ता
तो पहले अपने मन में प्यार का एक फूल खिलाकर तो देखो
दोस्ती होती है एक दूसरे का साथ पाने के लिए।

मुझसे मिलने कब तुम आते हो प्यारे

मुझसे मिलने कब तुम आते हो प्यारे
कहाँ छिपाकर रखें तुमको प्यारे।
कितने युग बीत गए एक इंतजार में तुम्हारे,
तुम्हारे चरणों की ध्वनि सुनकर हम आए।
चुपके से क्यों मेरे हृदय में आ गए
मन की इस पीड़ा को क्यों तुम जगा गए।
आने वाले ए अजनबी मेरे मन के कौने- कौने में बस जा,
बस कर मेरे मन की गहराई में मुझ में तू समाजा
तेरे जाने की खबर से मन मेरा थर-थर है कांपे।
मुझसे मिलने कब तुम आते हो प्यारे
कहाँ छिपाकर रखें तुमको प्यारे।
मानो आज हुआ है उसका अहसास
जो था अब ख्वाबों मे अब हुआ उसका अहसास
तुम्हारे मृदु तन की शोभा से विकसित हो गया मेरा अहसास
आने से तुम्हारे मन के फूलों का हो गया विकास।
मुझसे मिलने कब तुम आते हो प्यारे
कहाँ छिपाकर रखें तुमको प्यारे।