जब तुम मिले तो ऐसा लगा जैसे बरसों का खोया यार मिल गया .
आने से तुम्हारे सूने पड़े जीवन में बहार का मौसम छा गया .
अधूरी पडी उम्मीदों को एक राह का सहारा मिल गया
मिलकर दिन गुजरे महीने गुजरे गुजर गए साल .
जिन्होंने मेरे सपनों को अपने सपनो से जोड़कर एक मुकाम दे दिया
ना चाहकर भी हमसे नाता जोड़ लिया अपनी राहों को हमारी राहों से जोड़ लिया .
ठोकर खा –खा कर अब और जीने की आस ना रही
दिल पर अब और जख्म खाने की जगह ही ना रही .
मेरी खुशियों को अपनी खुशियों में ढाल लिया
मिलकर मुझसे मुझे जीना सिखा दिया .
काश मेरी खुशी किस में है यह भी जान लिया होता
गैरों ने जो जख्म दिया था वो तुमने तो ना दिया होता .
जिन खुशियों को देने की खातिर तुम हम से दूर हुए
दुनियां से लड़ –लड़कर थककर चूर हुए .
एक बार जान तो लिया होता आखिर मेरी चाह क्या है
दिल की हर धडकन में दिख जाता उसमें सिर्फ नाम तेरा है .









