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Thursday, October 29, 2009

माँ






माँ तुझे सलाम तेरे जज्बे को सलाम
देकर अपनी साँसें तूने मुझको जीवन दिया  है
तेरी आँखों से ही तो मैने देखी दुनिया सारी
देकर जीवन की साँसे तूने हम पर किया उपकार
माँ तुझे सलाम तेरे जज्बे को सलाम।





    अगर न होती तुम तो मुझको संसार में लाता कौन
    अगर न होती तुम तो मुझको जीवन देता कौन
    अगर न होती तुम तो संसार को बसाता कौन
    ईश्व पहुँच नहीं सकता हर जगह इसलिए उसने बनाया तुमको
 




        माँ तुझे सलाम तेरे जज्बे कोसलाम।                                                                 
खुद भूखी रहकर मेरा पेट सदा ही भरती हो
खुद धूप में नंगे पाँव चलकर मुझे गोद में उठा ले जाती हो
आए कोई संकट मुझपर तुम मेरी ढाल बन जाती हो
मेरी रक्षा की खतिर तुम बडे-बड़ों से लड़ने से भी नहीं घबराती हो
माँ तुझे सलाम तेरे जज्बे को सलाम।





मेरी खुशियों की खातिर तुमने अपनी खुशियों का दिया है बलिदान
माँ तू ममता की है मूरत तुझमें ही बसता है भगवान
तेरे बिना इस जग में जीना नही तुझ बिन जीवन की कोई आस नहीं
हे माँ तुझे सलाम तेरे जज्बे को सलाम ।


2 comments:

  1. sir really a good poem. maa ka mahatv aapne kavita ke dvara sundar tareeke se prastut kiya hai. maa hamare sukh ke liye kuch bhi karne ke liye taiyar hote hai. maa ka pyar ka koyi seema nahi hoti. unka pyar ko tulna bahut mushkil hote hai. ve hamare liye hi jeete hai.
    bahut sundar kavita hai sir...

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  2. waah waah sir,
    aapko toh film industry me javed akhtar ki position leni chahiya. mujhe aapka kavita bahut pasand aaya sir.

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