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Monday, September 13, 2010

तितली रानी

       तितली रानी तितली रानी
       सुंदर -सुंदर पंख तुम्हारे
       इतने सुंदर पंख लाई कहाँ से ,


जब तुम फूलों पर मंडराती हो 
फूलों का रस ले जाती हो

       चुपके से तुम मेरी बगीया के फूलों का रस ले जाती हो
       फूलों के रस का क्या तुम अपने घर पर  शहद बनती हो,

होते पंख अगर मुझको भी
मैं भी फूलों पर संग तुम्हारे मंडराता
                                     लेकर फूलों से सुन्दर -सुंदर रंग
                                    मैं भी अपने सपनों को खूब सजाता

तितली रानी तितली रानी
फूल -फूल पर तुम मंडराती हो ,

2 comments:

  1. अच्छी पंक्तिया लिखी है आपने ....

    मुस्कुराना चाहते है तो यहाँ आये :-
    (क्या आपने भी कभी ऐसा प्रेमपत्र लिखा है ..)
    (क्या आप के कंप्यूटर में भी ये खराबी है .... )
    http://thodamuskurakardekho.blogspot.com

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  2. बच्चों की इस सुंदर कविता के लिए बधाई स्वीकारें॥

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