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Tuesday, September 29, 2009

दोस्ती

दोस्ती का दम भरने वालों सुनो ज़रा,
होती है क्या दोस्ती मुझे बताओ ज़रा।
सुना है दोस्त दोस्ती में जान दे देते हैं
दोस्ती वह नहीं जो दोस्तों की जान ले ले,
दोस्ती तो एक अहसास है जिसे देखकर महसूस किया जाता है।
दोस्ती वह भी नहीं जो मुस्कान देती है
मुस्कान का क्या ,वह तो बेवफा है,
एक पल होंटों पर आकर चली जाती है।
दोस्ती तो एक अरमान है
जो दिल से दिल मिलने की आस लगाए रहती है
अगर पाना है दोस्ती का गुलदस्ता
तो पहले अपने मन में प्यार का एक फूल खिलाकर तो देखो
दोस्ती होती है एक दूसरे का साथ पाने के लिए।

1 comment:

  1. hello sir ,

    kash me aapke jaisa poems likh sakte .
    all ur poems are fantastic sir and hats off to you.
    shweta

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