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Wednesday, January 12, 2011

ऑटोग्राफ भाग दो

“अच्छा चल खाना खा ले” - माँ ने कहा
अमित- “तुम चलो मैं आता हूँ।”
अमित  अपनी ऑटोग्राफ किताब को मेज पर रखकर खाना खाने चला गया । आज काफी दिनों के बाद माँ के हाथों का बना खाना खा रहा है। घर से बाहर रहकर नौकरी करनेवालों के लिए यह तो आम बात है। खाना खाने के बाद वह अपने छोटे भाई -बहन के साथ खेल में लग गया । खेलते- खेलते शाम हो गई थी।  शाम को टहलने के लिए घर से बाहर निकल गया । बाहर आकर उसने महसूस किया कि कितनी जल्दी यह दुनिया बदलती है, कुछ ही वर्षों पहले जिन गलियों में  अपने मित्रों के साथ खेलता था , जिनकी गूंज से सारी गलियाँ चहक उठती थी आज उसे वे अंजानी सी लग रही हैं । गलियाँ लोगों से भरी हुई हैं लेकिन आज वह उस भरी भीड़ में अकेला सा महसूस कर रहा है। बार -बार वह यही सोचता काश वो दिन फिर से लौट आएँ ....... ।  यह तो वह भी जानता है कि बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता जीवन में केवल बीते समय की  कुछ खट्टी -मीठी यादें ही रह जाती हैं। टहलते- टहलते वह उन सभी गलियों में गया जहाँ कभी उसकी मित्रमंडली खेला करती थी । धीरे- धीरे रात का  अँधेरा गहरा रहा था। कुछ घंटों बाहर घूमने के बाद वह घर वापस लौट आया । घर आकर उसने परिवार के साथ रात का खाना खाया ,परिवार के साथ कुछ समय बिताने के बाद अपने कमरे में चला गया वहाँ जाकर उसने फिर से अपनी ऑटोग्राफ की किताब उठा ली फिर उन पुरानी यादों को ताजा करने लगा अपने स्कूल के मित्र जिन्हें छोड़कर वह दिल्ली शहर में आ बसा था । एक-एक कर वह उस किताब के पन्ने पलट रहा था आठ -दस पन्ने पलटने के बाद वह कुछ रुक गया । अगले पन्ने से उसकी कुछ गहरी यादें जुड़ी थी । इस पन्ने में उसकी प्रेमिका ने  कॉलेज की फेयरवेल पार्टी  के बाद लिखा था ....
“जीवन की राह पर हम मिले ना मिले
याद तुम्हारी दिल में बसी रहेगी सदा।
राह फूलों भरी हो या हो काटों भरी
सुख में साथ सभी देते हैं ,दुख में साथ तुम्हारे मैं हो लुँगी
ना हो यकी तो आज़मा लेना ......।”
वह अपने कॉलेज के दिनों में खो गया..............।

आज अमित का कॉलेज में पहला दिन है , नया शहर नया कॉलेज सब कुछ नया वह बहुत डरा हुआ था पता नहीं कैसे लोग होंगे यहाँ के वह सहमा सा खड़ा था उसने नोटिस बोर्ड पर  अपनी कक्षा की जानकरी कर ली थी । अपनी कक्षा की जानकारी करके जैसे ही वह मुड़ा तो एक लड़का भागता हुआ आया उसके पीछे कुछ और लड़के भागे आ रहे थे वहाँ पर खड़े कुछ लैक्चररों ने उसे पकड़ लिया जब उन्होंने उसके भागने का कारण जाना तो उस लड़के की पिटाई कर दी । दर असल वह लड़का  अपने कुछ साथियों के साथ झगड़ा करके उनमें से एक की  बुरी तरह से पिटाई करके भाग रहा था उस लड़के के सिर से खून बह रहा था । कोई पुराना झगड़ा था ,कुछ लड़के उसे अस्पताल लेकर जा रहे थे । पहले ही दिन इस प्रकार की घटना देखकर अमित का दिल बैठा जा रहा था । उसे लग रहा था कि न जाने मैं किस प्रकार के माहौल में आ गया हूँ पहले ही दिन यह सब देखने को मिल रहा है तो आगे क्या होगा........? पहला दिन था पुराने विद्यार्थी अपने दोस्तों से मिलकर चहक रहे थे, अमित को रह रहकर अपने दोस्त याद आ रहे थे वह सोच रहा था कि यदि वह अपने पुराने शहर के किसी कॉलेज में होता तो वह भी इसी तरह अपने दोस्तों से मिल रहा होता। बार-बार उसके मन में  एक ही सवाल उठ रहा था कि क्या उसे फिर वैसे दोस्त मिलेंगे जिन्हें वह पीछे छोड़कर आया है ? यही सोचते -सोचते वह उस कक्षा तक जा पहुँता जहाँ सभी विद्यार्थियों को इकट्ठा होने के लिए नोटिस  बोर्ड पर लिखा गया था , सकुचाता सा वह कमरे के अंदर घुसा कमरा विद्यार्थियों से खचाखच भरा हुआ था । अंदर पहुँचकर अपने बैठने के लिए जगह खोजी और वहाँ जाकर बैठ गया । सभी लोग वहाँ पर बैठे आपस में गपशप कर रहे थे कोई किसी से अपना परिचय कर रहा है कोई अपने मित्रों से नए लोगों का परिचय करवा रहा है।

अमित इस कॉलेज में ही नहीं बल्कि शहर में भी नया था सो उसे अपनी पहचान का कोई भी नहीं मिला तभी उसके पास खाली कुर्सी पर एक छात्र आकर बैठा वह भी अमित की तरह ही सहमा हुआ था कुछ देर तो दोनों शांत बैठे रहे फिर उस छात्र ने जो अभी अमित के पास आकर बैठा था उसने बात करने की पहल करते हुए अपना परिचय दिया । उसने अपना नाम गोविन्द बताया और बताया कि वह  भी इस शहर और कॉलेज में नया है मूलत: वह जयपुर शहर का रहनेवाला है ।  इसी महीने  दिल्ली आया है पढाई करने के लिए । अमित  ने भी अपना परिचय गोविन्द से किया । आज दोनों का कॉलेज में पहला दिन था दोनों एक दूसरे का साथ पाकर कुछ राहत सी महसूस कर रहे थे। कॉलेज में आए नए विद्यार्थियों का स्वागत किया गया । कॉलेज का पहला दिन तो ऐसा ही गुजरा परिचय करने कराने में । एक दिन कॉलेज के सीनियर छात्रों ने अमित की कक्षा के सभी विद्यार्थियों की रैगिंग की अमित बहुत सहमा हुआ था । उसने रैगिंग के बारे में सुन रखा था कि सीनियर छात्र अपने जूनियर छात्रों के साथ बहुत बुरी तरह से रैगिंग करते हैं लेकिन यहाँ तो वैसा कुछ नहीं था । सीनियर छात्रों ने केवल रैगिंग के नाम पर सब छात्रों के नाम पूछे और उनसे एक -एक गाना गाने को कहा । धीरे-धीरे समय बीतने लगा देखते ही देखते एक साल पूरा गुजर गया दूसरा साल भी आधा  बीत गया। अब तक कॉलेज में उसके दोस्तों का एक अच्छा खासा ग्रुप बन चुका था । अमित अपने ग्रुप से सभी का चहेता था । सभी लोग उससे प्रेम करते थे वह भी अपने दोस्तों का सदैव साथ देता था चाहे पढ़ाई हो या खेल वह हमेंशा अपने दोस्तों के कांधे से कांधा मिलाकर चलता था । अमित की दोस्ती निधी नाम की लड़की से होती है । दोस्ती कब प्यार में बदल गई पता ही नहीं चला अब तो हालत यह थी कि एक दूसरे के बिना कुछ अच्छा ही नहीं लगता था साथ पढ़ना , साथ घूमना और कभी -कभी तो कॉलेज का भी बंक हो जाता था ।

 दूसरे साल अमित का ध्यान पढ़ाई से हट चुका था इसका ही नतीजा था कि उसका दूसरे साल का रिजल्ट गिर चुका था कहाँ अस्सी प्रतिशत लानेवाला छात्र और कहाँ साठ प्रतिशत ।  अमित के दोस्तों ने उसे समझाया कि प्यार करना कोई बुरी बात नहीं पर तुम्हें अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान देना होगा ..... अगर ऐसा ही चलता रहा तो हो सकता है इस साल तुम फिर और नीचे स्तर पर पहुँच जाओ। अमित को भी अपने दोस्तों की बताई हुई बात समझ में आ गई कि यह सही है प्यार करना कोई गलत बात नहीं किन्तु प्यार से ही तो जीवन में आगे नहीं बढ़ा जा सकता है । जीवन में आगे बढ़ने के लिए उसे पढ़ाई के बाद नौकरी करनी होगी ....। उसने निधी को भी समझाया और खुद ने भी पढाई में मन लगाया जिसका नतीजा यह आया कि उसने उस साल कॉलेज टॉप किया था ।

अमित जितना पढ़ने -लिखने में होशियार था उतना ही  दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहता था । अमित की उदार ह्रदयता का एक उदाहरण देखने को मिलता है जब उसके एक साथी जयकुमार को ब्लड कैंसर हो गया था और उसके पास अपना इलाज करवाने के लिए पैसे नहीं थे जब अमित को पता चला कि उसका दोस्त इस प्रकार की भयंकर बीमारी से जूझ रहा है और उसके पास इलाज करवाने के लिए पैसे नहीं हैं उस दिन अमित जयकुमार के माता-पिता से मिलने उसके घर पर गया वहाँ जाकर देखा तो पता चला कि सचमुच उसकी आर्थिक स्थिति कितनी खराब है। अपने दोस्तों को अपने पास देखकर जयकुमार बहुत खुश हुआ खुशी कुछ ही क्षण उसके मुख पर रही फिर खुशी एक अंजाने दुख के पीछे छिप गई । अमित और उसके दोस्तों को देखकर जय की माँ की आँखों से आँसू बहने शुरू हो गए । अमित ने जय की माँ को आश्वासन दिया कि वे लोग जय के इलाज के लिए कुछ न कुछ ज़रूर करेंगे । अमित ने जय के माता -पिता के सामने संकल्प लिया कि वे लोग जय का इलाज ज़रुर करवाएंगे । कुछ देर जय के पास ठहरने के बाद अमित और उसके अन्य साथी वहाँ से चले आए । अमित के मन में जय के इलाज के लिए पैसे कैसे इकट्ठा होंगे यही बात चल रही थी । तभी उसे ख्याल आया क्यों न सभी दोस्त मिलकर जय के इलाज के लिए चंदा इकट्ठा करे तभी जाकर उसका इलाज संभव हो पाएगा। अमित की निस्वार्थभाव सेवा को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने भी अपनी तरफ से जय के इलाज के लिए दस हजार रुपए का चंदा दिया । अमित और उसके दोस्तों ने  पाँच दिनों में दो लाख रुपए जमा कर लिए थे। उन पैसों से उसने अपने दोस्त को एक नया जीवन दिलवाया ।

समय बीतता गया और कॉलेज का वह दिन भी आ गया जिस दिन उन्हें उस कॉलेज से विदा होना था । आज कॉलेज का वार्षिकोत्सव है। अमित को कई खेल-कूद प्रतियोगिताओं  में प्रथम आने के लिए पुरस्कार दिया गया , कॉलेज में टॉप करने के लिए उसे कॉलेज की तरफ से एक हजार एक रुपए का पुरस्कार भी मिला और ‘बेस्ट स्टुडेन्ट ऑफ इयर’ का अवार्ड भी अमित को ही मिला । इतने सारे पुरस्कार पाकर वह खुश तो बहुत था किन्तु अपने कॉलेज को छोड़ने का एक दुख भी साफ-साफ देखा जा सकता था उसकी नजरों में आज वह हँस तो रहा था किन्तु दिल से नहीं उसे पता है आज के बाद वह उस कॉलेज का हिस्सा नहीं रहेगा आदि बातें सोचने लगता है..वह यह भी जानता है कि एक न एक दिन उसे कॉलेज तो छोड़ना ही है पर....... आज उसे वह दिन फिर से याद आ गया जब वह अपने स्कूल के मित्रों से बिछड़ कर यहाँ आया था । एक वह दिन था और आज का दिन है । अमित अपने उस अतीत में फिर से खो गया आज अमित को किसी दूसरे शहर नहीं जाना था बल्कि जीवन की यथार्थ स्थिति में जो जाना है । अब तक तो बस यह था कि खाना खेलना पढ़ना यही था किन्तु जीवन की भागा दौड़ी में तो अब उसे शामिल होना है ,सबसे पहले नौकरी पानी है ...... । उससे ज्यादा उसे इस बात का दुख था कि आज वह अपनी प्रेमिका से भी बिछड़ रहा है फिर पता नहीं कब मिले , मिले भी या नहीं क्या पता जीवन का क्या भरोसा कब क्या हो जाए   उस क्षण जब अमित और निधी अलग हुए थे तब निधी ने उसे उसकी ऑटोग्राफ किताब में लिखा था ...
“जीवन की राह पर हम मिले ना मिले
याद तुम्हारी दिल में बसी रहेगी सदा।
राह फूलों भरी हो या हो काटों भरी
सुख में साथ सभी देते हैं ,दुख में साथ तुम्हारे मैं हो लुँगी
ना हो यकी तो आज़मा लेना ......।”
अमित को क्या पता थी कि जो पंक्तियाँ निधी उसकी ऑटोग्राफ किताब में लिख रही है वह मात्र लिखने के लिए ही लिख रही है ....।

कॉलेज की पढ़ाई भी समाप्त हो गयी कुछ दिन अमित ने दिल्ली में ही नौकरी की खोज की लेकिन .. ..? नौकरी की खोज जारी थी ...। एक दिन अमित अपने कमरे में बैठा टी.वी देख रहा था कि  निधी का कॉल आया अमित ने कॉल उठाया .......। निधी की बातें सुनकर अमित के पैरों तले की ज़मीन खिसक गई। निधी ने बताया कि उसके पिताजी ने उसकी शादी तैय कर दी है ।  अगले महीने की बीस तारीख को उसकी शादी है। अमित के लिए यह एक चौकानेवाली खबर थी । उसने निधी से पूछा भी कि वह किसी और से शादी कैसे कर सकती है। उसने वादा भी किया था कि वह जीवन में उसी के साथ विवाह करेंगी..... क्या हुआ उस वादे का ....? निधी ने उसके किसी भी प्रश्न का कोई जवाब नहीं दिया । उसके पास कोई जवाब होता तो देती ना । उसने कभी उससे सच्चा प्रेम किया होता तो उसके दर्द को महसूस करती, उसने तो उसे सिर्फ एक मोहरे की तरह उसे इस्तमाल किया था। अब कॉलेज की पढ़ाई खत्म हो चुकी थी , अब उसका  कोई काम नहीं था .... । अमित ने कई बार पूछा लेकिन निधी ने एक प्रश्न का भी जवाब नहीं दिया । अमित समझ गया कि वह उससे विवाह ही नहीं करना चाहती । निधी ने ‘अमित तुम मेरी परेशानी को समझो ......?’  कहकर फोन रख दिया। 
 
अमित समझ नही पा रहा था कि निधी ने आखिर ऐसा क्यों किया जब कॉलेज में थी तो वह उसके बिना एक पल भी नहीं रह पाती थी आज उसने उसे छोड़कर किसी और को पसंद करके शादी करने का भी फैसला कर लिया .....। कॉलेज के समय ही अमित ने उससे शादी के विषय पर बात भी की थी । निधी ने बताया था कि उसे अमित से शादी करने में कोई एतराज़ नहीं है और ना ही उसके घरवालों को फिर अचानक यह सब .....? उसकी समझ में  नहीं आ रहा था कि निधी पहले झूठ बोल रही थी या अब। वह अपनी इसी कश्मकश में बैठा सोच रहा था कि यह सब क्या हो रहा है…..?  उसका एक दोस्त गौरव जो उसके घर के पास ही रहता है आया गौरव ने जब अमित को उदास देखा तो उसकी उदासी का कारण जाना । गौरव को जब यह पता चला कि वह निधी को लेकर परेशान है तब गौरव ने उसे बताया कि निधी को कभी उससे प्यार था ही नहीं वह तो केवल उसका इस्तमाल कर रही थी एक मोहरे की तरह उसे पता था कि अमित कॉलेज में होशियार लड़का है और वही उसे उसके नोट्स बनाने में उसकी मदद कर सकता है इसीलिए उसने उसके साथ प्यार का यह झूठा नाटक किया था। गौरव ने बताया कि वह और उसके दोस्त इस बात को बहुत पहले से जानते थे किन्तु उन्होंने इस बात को राज़ ही रखा क्योकि वे जानते थे कि तुम निधी को ज़ी-जान से चाहते हो अगर तुम्हें यह सब पता चलेगा तो तुम उनकी बातों पर यकीन नहीं करोगे और यदि यकीन कर भी लेते तो तुम्हारा डिग्री का रिजल्ट बिगड़ जाता । उसकी शादी तो चार महीने पहले ही तैय हो चुकी थी, वे लोग इस बात को भी जानते थे किन्तु उस समय परिक्षाओं  की तैयारी में लगे होने के कारण किसी ने उसे इस बात को बताना उचित नहीं समझा.......। गौरव ने अमित को समझाया कि जो होता है अच्छे के लिए ही होता है।  शायद इसी में तुम्हारी कोई भलाई छिपी हो ....। अब अपनी पुरानी बातों को भूल कर अपने आगे के भविष्य की सोचो .....। अमित एक बुत सा बना गौरव की बातें सुन रहा था अभी भी उसे यकीन ही न  हीं हो रहा था कि….. निधी उसके साथ ऐसा फरेब कर सकती है..। कुछ समय बाद गौरव चला गया । अमित को लग रहा था जैसे आज उसके शरीर में प्राण ही ना हों.. रह -रह कर उसे निधी के साथ बिताया हुआ हर पल हर लम्हा याद आ रहा था । भोली-भाली  मासूम सी दिखने वाली निधी ऐसा भी कर सकती है उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था ।  
अमित बिना किसी से बात किए अपने कमरे में जा बैठा …….। उसकी आँखों से आँसू की बूँदे टपकने लगी…..।  तभी माँ ने उसे आवाज़ दी ..
माँ- “अमित चल खाना खा ले नहीं तो ठंडा हो जाएगा ..।”

माँ ने उसे दो - तीन बार पुकारा तब जाकर वह खाना खाने के लिए चला तो गया किन्तु आज तो जैसे उसकी भूख ही मर चुकी थी उसे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था । एक रोटी खाकर वह उठ गया । माँ के खाना न खाने की वजह पूछने पर उसने बता दिया कि आज वह थोड़ा बहुत बाहर ही खाकर आया था इसीलिए ज्यादा भूख नहीं है...। वह चुप चाप अपने कमरे में चला गया ..। निधी की तस्वीर उसकी आखों से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी । बार -बार वह अपने मन को दिलासा देता कि चलो कोई बात नहीं वह जहाँ भी रहेगी कम से कम खुश तो रहेगी ... पर क्या करे जितना अपने मन को निधी की यादों से हटाना चाहता है उतना ही ज्यादा वह याद आती जा रही थी । क्या करे दिल है कि मानता नहीं। यह स्वीकार करने को तैयार ही नहीं कि जिसे उसने चाहा, अपना सबसे अज़ीज माना उसने उसके साथ इतना बड़ा विश्वाशघात किया है । जिसे आज तक वह अपना समझता था  कुछ ही  दिनों बाद किसी और की हो जाएगी। उस रात उसे नींद ही नहीं आई सारी रात यही सोचता रहा कि निधी ने ऐसा क्यों किया .....? अगली सुबह उसने निधी को फोन किया और उससे मिलने के लिए कहा लेकिन निधी ने उससे यह कहकर मिलने से मना कर दिया कि अब वह घर से बाहर नहीं निकल सकती घर में शादी की तैयारियाँ चल रही हैं । घर से बिना कारण वह बाहर नहीं जा सकती अगर वह घर से बाहर जाएगी भी तो उसके साथ कोई न को घर का बड़ा व्यक्ति रहेगा ....। एक वह समय था जब अमित निधी को कही घूमने के लिए कहता तो वह तुरंत तैयार हो जाती थी । तब तो उसे घर या कॉलेज में किसी से डर नहीं लगता था फिर आज अचानक घरवालों से इतना कैसे डरने लगी। अमित ने निधी से कहा कि वह  केवल आखिरी बार मिलना चाहता है एक बार उसे देखना चाहता है ।  अमित ने निधी को आश्वाशन दिया कि वह उसे शादी करने से नहीं रोक रहा बस एक बार उससे मिलना चाहता है, उसे एक बार जी भरकर देखना चाहता है। निधी ने उसकी बातों को अनसुना करके फोन रख दिया ।  

अमित को गौरव द्वारा बताई हर एक बात पर यकीन हो गया कि गौरव जो कह रहा था वह सब सही है। क्या कभी उसने मुझसे प्रेम किया ही नहीं फिर वह सब क्या था .......? हाँ वह उसको चाहती ही नहीं थी । वह सब उसका दिखावा था, फरेब था …। देखते ही देखते निधी की शादी भी हो गई वह अपनी ससुराल चली गई ।इन दिनो अमित बहुत उदास रहने लगा घरवालों को लग रहा था कि वह नौकरी न मिलने की वजह से परेशान रह रहा है। कहते हैं ना कि समय एक ऐसा मरहम है जो बड़े से बड़े घाव को भी भर देता है। अमित ने भी अपने आप को निधी की यादों से बाहर निकाले के लिए अपने आप को इतना व्यस्त कर लिया कि कुछ भी इधर - उधर का  सोचने के लिए समय ही नहीं मिलता था अब वह घर पर ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था । उसकी मेहनत और विषयों की अच्छी  जानकारी के कारण उसके पास  पंद्रह- बीस  बच्चे ट्यूशन पढ़ने आने लेगे । किन्तु अमित के जीवन का लक्ष्य बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना नही था ...। इस दर्द को तो वही महसूस कर सकता है जिस पर बीतती है। अमित के दोस्त जानते थे कि आज कल वह इतना व्यस्त क्यों हो गया है । उसके दोस्तों ने भी उसका पूरा साथ दिया कभी भी उसे यह महसूस नहीं होने दिया कि वह अकेला है...। दोस्तों के प्यार और अपनी मेहनत के बलबूते पर उस गम से वह धीरे-धीरे बाहर आने लगा। धीरे- धीरे यह समय भी बीता और एक दिन.......?
क्रमश.
आगे की कहानी  कुछ ही दिनों में......
    

27 comments:

  1. नमस्ते शिव कुमार जी,
    सर्वप्रथम आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये, मुझे आपके ऑटोग्राफ के इस दूसरे भाग का बेसब्री से इंतज़ार था. आपके ऑटोग्राफ के इस दूसरे भाग ने मुझे अपने कॉलेज के दिन याद दिला दिए. आपने ऑटोग्राफ की इस कहानी को फिर से ऐसे मोड़ पर रोका हैं कि मेरी उत्सुकता और भी बढ़ गयी हैं कि आगे क्या होगा? कृपया अगली किश्त जल्द ही ब्लॉग पर डाले.
    आप को बहुत धन्यवाद
    अनुराग अमित

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  2. पहली बार पढ़ रहा हूँ आपको और भविष्य में भी पढना चाहूँगा सो आपका फालोवर बन रहा हूँ ! शुभकामनायें

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  3. किस बात का गुनाहगार हूँ मैं....संजय भास्कर
    नई पोस्ट पर आपका स्वागत है

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  4. shiva jee...many many thanks for comming on my blog....mai aapke blog par pahli baar aaya....iski ruprekha mujhe kaphi achchi lagi aur aapki kahani autograph abhi thoda samay kam hone ke kaaran nahi padh paa raha hoon ..par kabhi fursat me dono bhaag padhuga aur fir tisare part ka intjaar karunga....

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  5. शिव जी कहानी बढ़िया जा रही है। इसे पढ़कर सबको कहीं न कहीं अपने पुराने दिन याद आएँगे। मैं स्वयं पुरानी यादों में खो गया। यही इसकी सफलता है।
    जो बात खटक रही है वो भी बता दूँ- कहानी बहुत फिल्मी सी लग रही है नायक को आपने बिलकुल हीरो की तरह पेश किया है। हर व्यक्ति में कुछ न कुछ कमियां बुराइयां होती ही हैं और हर व्यक्ति अपने जीवन में गलतियाँ करता है फिर अमित इन चीजों से परे कैसे रह सकता है?
    हो सके तो अगली किश्त में थोड़ा 'humor' भी डालें, माहौल कुछ संजीदा हो रहा है।

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  6. शिव जी , आप मेरे ब्लॉग पर आये /
    आपका आभार ...
    ब्लॉग से हर क्षेत्र के लोग जुड़े है ..जिसके कारान पढने को बहुत सामग्री है
    बहुत सुंदर लगा आपका औटोग्राफ ...
    मेरे दुसरे ब्लॉग पर भी आये
    २१ वी सदी का इन्द्रधनुष ..
    babanpandey.blogspot.com
    i followed u

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  7. मकर संक्राति ,तिल संक्रांत ,ओणम,घुगुतिया , बिहू ,लोहड़ी ,पोंगल एवं पतंग पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं........

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  8. follow kar liya hai...
    kahani bhi save kar li hai....abhi samay thoda kam hai, aata rahoonga...

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  9. शिवा जी....
    दूसरा भाग भी अच्छा बन पड़ा है.......कुछ हिस्से सचमुच दिल को छूने वाले है ........किशोरावस्था का प्रेम और युवावस्था का छल....लगता है अमित के बड़े होने का समय आ गया है.....

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  10. कहानी अच्छी है ,अगली कड़ी का इन्तजार है !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  11. कहानी बहुत पसंद आई। आगे की कहानी भी जल्दी ही लिखिएगा।

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  12. पहली बार आई हूँ आपके ब्लॉग पर अच्छा लगा आना. अच्छी चल रही है कहानी. अगली कड़ी की प्रतीक्षा है.

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  13. अच्छी कोशिश है आपकी लगे रहें ..

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  14. आप मेरे ब्लोग पर आये उसके लिए आभार । अच्छा लगा आपको पढ़कर ।

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  15. अनुराग अमित , ऋषभदेव शर्मा जी ,संजय , मार्क , सोमेश , बबन, भाकुनी ,शेखर ,ज़ेअल, प्रदीप ,ज्ञानचंद , ,विरेन्द्र सिंह , रचना दीक्षित, मनीष कुमार , और मिथिलेश
    आप सभी का बहुत - बहुत धन्यवाद , अपना कीमती समय देने के लेये..

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  16. आपकी कहानी का शीर्षक मन में हलचल पैदा करता है ..कहानी की भाषा शैली ..बहुत सुगठित है ..बहुत सुंदर ..अगली कड़ी का इन्तजार है

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  17. बहुत ही रोचक कहानी

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  18. सच ही कहा हैं, बातें भूल जाती हैं, यादें याद आती हैं..अच्छा प्रयास आपका

    नीलाभ कुमार

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  19. achhi kahani
    ...
    kabhi mere blog par pe bhi aaye
    www.deepti09sharma.blogspot.com

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  20. बहुत सुंदर लगा आपका औटोग्राफ| धन्यवाद|

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  21. very interesting story sirji.... but tell me when will u end this suspense....
    waiting for the rest half of the story....
    ravali

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  22. कहानी का कथानक और शैली दोनो ही अच्छे लगे। इस पोस्ट को पढने से पहले आपकी पुरानी पोस्ट पढी आटोग्राफ पार्ट एक। अभी तक की कहानी बहुत बढिया बनी है।
    अगले पार्ट का इन्तजार है

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  23. kahani sundar lagi
    aapke likhne ka dhang bhi bahut rochak hai
    ab agle hisse ka intjaar rahega

    aabhaar

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  24. लरिकाई कौ प्रेम कहो अलि कैसे छूटै.....

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