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Wednesday, November 4, 2009

बुराई पर भलाई की जीत

एक गाँव में भोला सिंह नाम का किसान रहता था । वह बड़ा ही घमंड़ी और झगड़ालू था । उसके इसी स्वभान के कारण गाँव के सभी लोग उससे दूर ही रहते थे । भोला सिंह अपने आप को गाँव का सबसे श्रेष्ठ व्यक्ति मानता था । वह अपनी झूठी अकड़ के किसी की एक न सुनता , इसी कारण गाँव के लोग उससे कन्नी काटते रहते थे , झगड़ालु स्वभाव के कारण ही वह पुरे गाँव में बदनाम था । गाँव का कोई भी व्यक्ति न तो उसकी सहायता करना चाहता था और ना ही उससे किसी भी प्रकार की सहयता की आस करता था । गाँव के सभी लोग एक दूसरे के सुख -दुख के शामिल होते , एक दूसरे के कामों में मदद करते किन्तु भोला सिंह इन सब से बिल्कुल अलग वह अपनी मस्ती में ही रहता । कुछ समय बाद उस गाँव में मोहन सिंह नाम का एक किसान आकर बस गया । मोहन सिंह स्वभाव से हँसमुख, दरियादिल और मिलनसार इन्सान था । वह सभी से हँस प्रेम से बाते करता और वक्त आने पर सब की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता था । कुछ ही दिनों में वह गाँव का चहेता बन गया , अपने सद्व्यवहार से उसने गाँववालों के दिलों में अपने लिए खास जगह बना ली थी । गाँववाले भी मोहन सिंह की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते थे । एक दिन गाँव वालों ने मोहन सिंह को भोला सिंह के स्वभाव के बारे में बताया और उसे भोला सिंह से बचकर रहने की सलाह देते हुए कहा –“ कि मोहन तुम भोला सिंह से हो सके तो दूर ही रहना । वह अच्छा इन्सान नहीं है, बड़ा ही घमंडी और झगड़ालू किस्म का इन्सान है।”

गाँववालों की बातें सुनकर मोहन सिंह मुस्कराते हुए बोला – “भोला सिंह मुझसे भला क्यों झगड़ा करेगा मैने उसका क्या बिगाड़ा है, जो वह आकर मुझसे लड़ेगा। अगर वह मुझसे झगड़ता भी है तो मैं उसे सही पाठ पढ़ा दुँगा फिर वह कभी भी किसी से झगड़ा नहीं करेगा।” गाँववालों को मोहन की बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था कहा एक सीधा साधा इन्सान और कहाँ वह सर फिरा इन्सान पता नहीं मोहन किस प्रकार भोला सिंह का मुकाबला कर सकेगा। जब भोला सिंह को इस बात की जानकारी मिली कि मोहन सिंह मुझसे मुकाबला करके मुझे पाठ पढ़ाएगा तो वह क्रोध से लाल-पीला हो गया । अब तो भोला सिंह मोहन सिंह से मुकाबला करने के लिए आतुर हो उठा । एक दिन उसने मोहन के खेतों में अपने बैल छोड़ दिए । बैलों ने मोहन के खेतों की फसल को काफी नुकसान पहुँचाया किन्तु मोहन ने भोला सिंह से कुछ न कहते हुए दोनों बैलों को खेत से बाहर निकाल दिया । अपना वार खाली जाते हुए देखकर भोला सिंह और क्रोधित हो उठा । वह बार -बार मोहन सिंह से झगड़ने के उपाय करता किन्तु मोहन सिंह उसके वारों का हँसकर मुकाबला करके उसके वार को नाकाम कर देता । मोहन हमेशा अपना समय दूसरो का सम्मान करने और दूसरों की मदद करने में व्यतीत करता किन्तु भोला सिंह हमेशा अपना संमय दूसरों को अपमानित करने लड़ने झगड़ने में ही बिताता था ।

एक दिन मोहन के एक मित्र ने उसके परिवार के लिए ढेर सारे मीठे रसीले आम भेजे थे। मोहन सिंह ने सभी गाँववालों के घर थोड़े -थोड़े आम भेजे । उसने कुछ आम भोला सिंह के घर भी भिजवाए थे किन्तु भोला सिंह ने आमों को यह कहकर वापस लौटा दिया कि वह कोई भिखमंगा नहीं है जो ऐरे गैरे के घर से आए हुए सामान को स्वीकार कर ले । इस पर मोहन सिंह ने भोला सिंह को कुछ नही कहा और बात आई और गई हो गई । धीरे -धीरे मौसम में बदलाव होने लगा गरमी का मौसम समाप्त हो चुका था बरसात का मौसम शुरु हो चुका था । बरसात के मौसम में एक दिन भोला सिंह अपनी बैलगाड़ी में अनाज भरकर पास ही शहर की मंडी में बेचने जा रहा था । गाँव के कुछ ही दूरी पर एक नाला बहता था। जब भोला सिंह गाँव के उस नाले को अनाज से भरी गाड़ी से पार कर रहा था , उसकी बैलगाड़ी नाले में फँस गयी । भोला ने बैलगाड़ी को बाहर निकालने की जी तोड़ मेहनत की लेकिन वह गाड़ी निकालने में नाकाम रहा । थक हार कर वह नाले के एक किनारे पर जाकर बैठ गया । गाँववालों को इस बात का पता चल चुका था कि भोला सिंकी की अनाज के भरी बैलगाड़ी नाले में फँसी हुई है किन्तु किसी ने भी भोला की मदद के लिए जाना जरूरी नहीं समझा । जब मोहन को इस बात का पता चला तो वह तुरंत अपने दोनों बैलों को लेकर नाले पर भोला की मदद करने चला गया । मोहन सिंह को देखकर पहले तो भोला सिंह सकपका गया और फिर उसने मोहन से कहा – "मुझे तुम्हारी सहायता की आवश्यकता नहीं है । तुम जैसे आए हो वैसे ही वापस गाँव लौट जाओ ।" भोला सिंह की कटु बातें सुनकर मोहन सिंह पहले तो मुस्कुरा दिया और मुस्काते हुए बोला – “तुम्हें जितना क्रोध करना है करों ,पर मैं तुम्हें रात में यहाँ अकेला नहीं छोड़ सकता । गुस्सा करना तुम्हारा काम दूसरो की मदद करना मेरा काम” कहते हुए मोहन ने अपने दोनो बैल गाड़ी में जोत दिये। उसके ताकतवर बैलों ने थोड़ी ही देर में अनाज से भरी गाड़ी को बाहर निकाल कर खड़ा कर दिया । मोहन सिंह के सद्व्यवहार को देखकर भोला सिंह को अपने आप पर लज्जा आने लगी । उसका झूठा घमंड चूर -चूर हो चुका था । भोला ने मोहन से अपने दुर्व्यवहार के लिए क्षमा माँगी और वादा किया कि अब वह कभी भी किसी से न तो लड़ेगा और न ही किसी को सताएगा। किसी ने सच ही कहा है जो लोग झूठा घमंड करते है उन्हें सदैव नीचा देखना पड़ता है । घमंड़ी व्यक्ति कभी भी किसी का प्रिय नहीं हो सकता । घमंड ( अहंकार ) व्यक्ति के सोचने समझने की शक्ति को नष्ट कर देता है । अब भोला सिंह पूरी तरह बदल चुका है । वह गाँववालों के साथ मिलजुलकर रहने लगा है । एक इन्सान ने उसके जीवन को पूरी तरह बदल दिया । उसकी भलाई ने भोला की बुराई को जला दिया और उसे एक अच्छा इन्सान बना दिया । इस लिए हमें कभी भी घमंड़ नहीं करना चाहिए हमें दूसरों का सम्मान करना चाहिए और उनकी सहायता करनी चाहिए।

2 comments:

  1. hi sir...
    nice story sir. its true sir, always good will win over evil. lekin aaj kal sare log ghamandi hote ja raha hai.yah bahut durbhagya hai ki yeh ghamandi vyavahar keval badom me hi nahi, balki bacchom me bhi hai.bache apne parivar se hi seekhte hai.
    aaj es yugh me koyi kisi ke bare me sochne vale bahut kam hai.. sirf apne aap ke liye hi jeete or marte. people have become very very selfish sir...
    really very good story sir.
    ravali

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  2. अच्छी रचना
    बुराई पर भलाई की जीत होती है
    लेकिन आज कल तो चारों ओर बुराई का साम्राज्य है

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