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Tuesday, May 22, 2012

लत


सुनिल अपने जवान बेटे सुरेश की दिन प्रतिदिन बढ़ती माँगों से तंग आ चुका था  आए दिन किसी न किसी चीज के लिए पैसों  की मांग ने उसका जीना दूभर कर दिया था | बेटे के भविष्य को लेकर वह अकसर परेशान रहता था जवान बेटे से ज्यादा कुछ कह भी नहीं सकता था | आय का साधन मात्र दस बीघा ज़मीन थी जिस पर दिन रात मेहनत करके किसी न किसी प्रकार अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था | उसने सुरेश को अच्छे से अच्छे स्कूल में दाखिला दिलवाया लेकिन सुरेश का मन कभी भी पढ़ने - लिखने में नहीं लगा | सुरेश अकसर पढ़ाई के नाम पर किसी न किसी चीज के लिए पिता से पैसों की मांग करता रहता | पिता भी यह सोचकर कि उसकी पढ़ाई में किसी प्रकार की रूकावट ना हो कहीं न कहीं से पैसों का इंतजाम कर देता था | सुरेश इन पैसों को  अपने दोस्तों के साथ मौज मस्ती में उड़ा देता | इसी तरह उसने पढ़ने –लिखने के बहाने  जीवन के दस साल बर्बाद कर दिए | उसने किसी न किसी  तरह कक्षा दस तक की पढ़ाई खत्म की | कक्षा दस की पढ़ाई के बाद सुनिल उसे आगे पढ़ाने में असमर्थ था इसीलिए उसकी पढ़ाई बंद करवा दी | 

पढ़ाई बंद होने के बाद सुरेश को पढ़ाई के नाम पर मिलने वाले पैसे भी बंद हो गए | सुनिल ने यह सोचकर उसकी पढ़ाई बंद करवाई थी कि अब वह बड़ा हो गया है, वह उसका खेती के कामों  में हाथ बटाएगा लेकिन ऐसा हो न सका.....| सुरेश की  दिन- प्रतिदिन पैसों की मांग के कारण घर में तू –तू मैं मैं  होने लगी |  जब सुरेश की मांग घर में पूरी नहीं होती तो उसने दोस्तों से पैसे उधर लेना शुरू कर दिया | इन पैसों से वह अपने शौक जैसे बीडी-सिगरेट , शराब पीना पूरे किया करता | अपने इन्ही शौकों  के कारण उसकी संगति दिन- प्रतिदिन खराब होती जा रही थी | धीरे –धीरे वह नशे का शौकीन होता जा रहा था | जब माँ –बाप को उसकी इन करतूतों की जानकारी मिली तो उनके पैरों तले से ज़मीन खिसक गई | उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनका लाल इस प्रकार ......माँ –बाप ने उसे बहुत समझाया लेकिन सब बेअसर साबित हुआ | उसकी इन आदतों के कारण अकसर घर में कलह होती रहती |

एक दिन वह घर से यह कह कर शहर चला आया  कि वहाँ जाकर नौकरी करेगा| शहर में आकर उसने अपने लिए एक नौकरी तलाश की कुछ ही दिनों में उसे एक किराने की दुकान में काम मिल गया | कुछ दिन तो उसने उस किराने की दुकान में काम किया लेकिन  मासिक वेतन  कम होने के कारण उसकी ज़रूरतें पूरी नहीं हो पाती थी जिसके कारण उसने वह  नौकरी छोड़ दी  और दूसरी नौकरी की तलाश में निकल पड़ा | कुछ ही दिनों में उसे एक दूसरी नौकरी भी मिल गई इस बार उसे नौकरी एक ज्वेलरी शो रूम  में मिली थी और  वेतन भी पिछली नौकरी की तुलना में अधिक था | यहाँ वह मन लगाकर काम करने लगा और अपनी मेहनत से जल्द ही एक कुशल कारीगर बन गया | सुरेश ने कुछ ही वर्षों में उस दुकान के मालिक संजय का विश्वास इस कदर जीत लिया था कि वह उसे अपने बेटे के सामान ही प्रेम करने लगा था और उसके भरोसे सारा शोरूम छोड़ जाता था  | धीरे –धीरे समय गुजरता गया सुरेश की पुरानी आदतें शहर में आकार और बढ़ गई थी | उसका खर्चा दिन –प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा था  अपने ख़र्चों को पूरा करने के लिए उसने यहाँ भी अपने दोस्तों से उधर लेना शुरू कर दिया था | एक दिन कुछ कारणों से वह काम छोड़ कर दिल्ली चला गया |  यहाँ आकार उसने एक कपड़े के शोरूम में काम करना शुरू कर दिया |  

    दिल्ली में  काम करते हुए उसे कम से कम पाँच –छह महीने बीत गए | यहाँ भी वह ज्यादा दिन काम पर न टिक सका और एक दिन फिर उसी ज्वेलरी शोरूम  जिसमें वह पहले काम किया करता था के मालिक संजय से जाकर मिला और फिर से उसे काम पर रखने की याचना की | संजय उसके बारे में जानता था इसीलिए  उसने उसे काम पर फिर से रख लिया उसे तो यही लग रहा था कि वह तो उसका विश्वास पात्र व्यक्ति ही है | सुरेश यहाँ पर फिर से मन लगाकर काम करने लगा | संजय को उस पर पहले से ही विश्वास था इसी लिए वह अकसर शोरूम को उसके भरोसे छोड़कर अपने अन्य कामों के लिए चला जाता था | इसी तरह समय बीतता चला गया सुरेश को वापस काम पर आए हुए सात-आठ महीने हो चुके थे |

एक दिन संजय सुबह –सुबह  अपने घर पर सुबह की चाय पी रहे थे कि अचानक उनके साले ने फोन कर कहा कि उनके शोरूम में चोरी हो गई है और चोर सारे गहने और नगदी ले गए हैं |  शोरूम में चोरी की खबर सुनकर संजय के पैरों तले की जमीन खिसक गई वे चाय छोड़ कर सीधे शोरूम गए | शोरूम जाकर देखा तो उनके होश उड़ गए चोरों ने शोरूम ऐसे साफ कर दिया था जैसे किसी नए घर में झाड़ू लगा दी गई हो शोरूम में गहने और नगद रुपयों को मिलकर  कम से कम पचास लाख का सामन था | शोरूम में चोरी की शिकायत पुलिस स्टेशन  में दर्ज कराई | पुलिस ने उनकी शिकायत पर तुरंत कार्यवाही शुरू कर दी | शुरुआती जाँच में पुलिस का शक सुरेश पर ही गया क्योंकि जिस दिन से शोरूम में चोरी हुई थी उसी दिन से सुरेश वहाँ से गायब था और उसका सेल फोन भी बंद था |

इधर सुरेश अपने दोस्तों के साथ चोरी किए रुपयों से मौज –मस्ती में लगा था | उधर कई महीनों से अपने इकलौते जवान बेटे की कोई खबर न पाकर उसकी माँ का स्वास्थ्य खराब रहने लगा और इसी चिंता में एक दिन उसे  दिल का बड़ा दिल का दौरा पड़ा | माँ को पास ही कसबे के अस्पताल में  भर्ती करवाया गया | घरवालों ने उसे ढूंढने की बहुत कोशिशें की, उसके दोस्तों से पूछताछ की लेकिन सब कोशिशें नाकाम रहीं | घरवालों के पास उसका कोई पता ही नहीं था | उन्होंने उसके सेल फोन  पर फोन करने की बहुत कोशिश की लेकिन उसका सेल बंद था | एक तो दिल का दौरा उस पर से इकलौते बेटे की कोई खबर न पाकर  किसी अनहोनी की आशंका की चिंता में  उसकी माँ ने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया | सुरेश की माँ का इस प्रकार इस संसार से चले जाना घर परिवार के लोगों के लिए एक ऐसा आघात था जिससे बाहर आने  में उन्हें न जाने कितना समय लग जायेगा  लेकिन जाने वाला तो चला गया पर अब घरवालों को सुरेश की चिंता सताने लगी कि आखिर वह है कहाँ .....|

इधर पुलिस को उसकी प्रारंभिक जाँच पड़ताल से पता चला कि सुरेश अपने  किसी दोस्त  के पास दिल्ली में रह रहा है | उन्होंने  उसे पकड़ने के लिए  एक योजना योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया और  संजय से उसकी  तस्वीर लेकर दिल्ली के लिए रवाना हुई |  पुलिस को उसके सूत्रों से पता चला कि सुरेश एक ऐय्यास किस्म का व्यक्ति है और वह  डाँस बार में जाने का बहुत शौकीन है | पुलिस ने उसकी तस्वीर लेकर दिल्ली में बने सभी डाँस बारों, लॉजों  में जाकर पूछताछ की | इसी पूछताछ के दौरान पुलिस को सुरेश के किसी होटल में आने  के पक्के सबूत मिले | पुलिस उस होटल के मैनेजर से मिली और सुरेश के विषय में बताया और कभी भी सुरेश के उस होटल में आगे पर पुलिस को सूचना देने की कहकर वे लोग वहाँ से चले गए | दो- तीन  दिन के बाद होटल  मैनेजर का फोन पुलिस को आया उसने बताया कि सुरेश आज उनके होटल में ठहरा है | मैनेजर के फोन आने के तुरंत बाद उन्होंने होटल पर छापा मारा और सुरेश को गिरफ्तार कर लिया | 

 पुलिस  सुरेश को  गिरफ्तार करके  अपने साथ उसी शहर लेकर आ गई जहाँ उसने चोरी की थी| पुलिस ने जब उससे उस चोरी के विषय में पूछा  पहले तो उसने  शोरूम में चोरी के इल्जाम को सिरे से नकार दिया लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया | उसने पुलिस को बताया कि उसने अपने दो मित्रों  के साथ मिलकर चोरी करने का षड्यंत्र रचा था| उसने और उसके मित्रों ने कई महीनों पहले ही शोरूम के ताले की डुप्लीकेट चाबी तैयार करवा ली थी  और एक दिन मौका देखकर उस शोरूम के गहने और नगदी को लेकर चंपत हो गए |  पुलिस के यह पूछने पर कि इतने पैसों का उसने क्या किया इसके जवाब में उसने बताया कि कुछ पैसे तो उसने और उसके मित्रों ने इधर –उधर घूमने शराब पीने और डाँस बारों में लुटा दिए | एक दिन उन तीनों दोस्तों में इन्ही  पैसों को लेकर झगड़ा हो गया | झगड़े को खत्म करने के लिए  उन तीनों दोस्तों ने चोरी के  सामन को बराबर –बराबर तीन हिस्सों में बाँट दिया और सब अपना– अपना हिस्सा लेकर अपने- अपने रस्ते चलते बने | कुछ महीनों बाद  सुरेश अपना हिस्सा लेकर दिल्ली आ गया | वह दिल्ली तो आ गया लेकिन उसके सामने एक सबसे बड़ी समस्या चोरी के उन गहनों को छिपाने की थी जिन्हें अभी तक बेच नहीं पाया था | 

उसने पुलिस को बताया कि जब वह दिल्ली आया था उसके कुछ समय बाद उसकी मुलाकात एक बारबाला (बारगर्ल ) शबनम  से हुई | पहले वह कभी –कभी  बार में जाता था लेकिन जब से उसकी मुलाकात शबनम से हुई थी तब से वह रोज उस बार में जाने लगा | उसे शबनम से प्रेम हो गया था | उसने शबनम पर दिल खोलकर पैसे लुटाए | जब तक उसके पास पैसे थे  तब तक  वह शबनम पर पैसे लुटाता रहा यहाँ तक कि उसने अपने घर के अधिकांश गहने भी चोरी करके उन गहनों को  बेचकर शबनम  पर लुटा दिया  | जब शबनम पर पैसे  लुटाने के सभी रास्ते बंद हो गए तब उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर उस शोरूम में चोरी करने का प्लान बनाया था |  सुरेश की बातें सुनकर वहाँ पर खड़े संजय और उसके साले के तो होश ही उड़ गए कि कोई अपनी  ऐय्याशी के लिए इतना बड़ा धोखा भी कर सकता है | सुरेश ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया| पुलिस ने सुरेश की सहायता से उसके अन्य दोनों दोस्तों को भी पकड़ लिया और चोरी गए माल में से पच्चीस –तीस लाख रुपए का माल वापस लिया और सुरेश और उसके दोस्तों को जेल में भेज दिया ...|

   सुरेश की इस चोरी की खबर जब उसके पिता को चली तो वे भी इस बात से बहुत आहत हुए बेटे के जेल में होने की खबर से उन्हें एक सदमा बैठ गया और वे अपना मानसिक संतुलन खो बैठे| सुरेश के रिश्तेदारों ने उससे मिलने की बहुत कोशिश की लेकिन वे मिल न सके | सुरेश अपने अपराध की तीन साल की सज़ा काटकर जब घर लौटा और उसे घर में घटित घटना की जानकारी मिली तो उसके पैरों तले की जमीन खिसक गई |  पिता को अपने सामने एक मानसिक रोगी की तरह खड़ा देखकर भौचक्का रह गया |  अपने इस अपराध को लेकर वह अपनी ही नजरों में गिर गया | आज उसे अहसास हो रहा था कि उसकी इन बुरी लातों के कारण उसने जीवन में क्या खो दिया है ............

8 comments:

  1. ्लत कोई भी हो बुरी ही होती है।

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  2. ghatnaaon ka ambaar laga diya aapne.
    maarmik prasangon ka vistaar hota to kahani dil ko chhoo saktee thee .
    ab to kareeb se hokar guzar gaee bas.

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  3. शुरु से अंत तक जिज्ञाषा बनी रही. आपके लेख में वर्णित सुरेश आपको हर गाँव में चार पांच मिलेंगे. एक दो को तो मैं खुद ही जानता हूँ.बढती हुई आकान्छाओं और विलासिता पूर्वक जीवन यापन करने की चाह में ऐसी लत लग ही जाती हैं......... सार्थक लेख के लिए बधाई..

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  4. वंदना जी , बबन जी ,ऋषभ देव शर्मा जी , एवं आशीष जी आप सभी का बहुत -बहुत धन्यवाद कि आप लोग मेरे ब्लॉग पर आए और कहानी पढ़ी ...और उस अपने अपनी राय दी इस के लिए बहुत -बहुत धन्यवाद .

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  5. अच्छी कहानी.....
    काश अहित होने के पहले लोग समझ पाते कि वे क्या कर रहे हैं.....

    सादर
    अनु

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  6. मैं सोचता हूँ किकोई भी लत बुरी होती है , और यह लत हर समय में थी ..पर आज की पीढी में यह लत दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है इस का असर हमारे समाज पर भी पड़ रहा है . समाज के नौजवानों की इस बुरी लत पर प्रकाश डालने के लिए बहुत बहुत -बहुत बधाई ...

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  7. Hi,
    Nice story shiv kumarji...addiction on anything is bad...and now a days it is very difficult to trust the people..We have to be addition free...

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