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Wednesday, July 16, 2014

अतीत



 वर्षों पहले जीवन में हुए हादसे ने सुनंदा के बसे-बसाए घर को तहस-नहस कर दिया था| हादसों की चोट ने हँसती-मुस्कुराती सुनंदा के चेहरे पर ना मिटनेवाली उदासी भर दी थी|  एक सड़क हादसे में उसके पति रोहन की मृत्यु हो गई थी| उस सड़क हादसे में सुनंदा और उसकी तीन साल की बेटी सीमा बाल-बाल बच गए, लेकिन रोहन की मृत्यु घटना स्थल पर ही हो गई|  रोहन और सुनंदा ने अपने घरवालों की मर्जी के खिलाफ घर से भागकर शादी की थी| दोनों के घरवाले उनकी इस हरकत से नाराज़ थे| उसकी मौत की खबर पाकर भी कोई उसकी अर्थी को काँधा देने नहीं आया| रोहन के दो-चार मित्रों को छोड़कर न परिवार का कोई सदस्य आया और ना ही कोई रिश्तेदार| एक ओर सड़क हादसे में पति की मौत दूसरी ओर घर –परिवारिश्तेदारों की बेरुखी ने उसे पूरी तरह तोड़कर रख दिया| क्या करे ...? किससे सहायत मांगे, इस अनजान शहर में दो –चार लोगों को छोड़कर कोई भी तो अपना नहीं है| इस मुसीबत की घड़ी में सुनंदा की सहेली सुमन ने उसे सँभाला| सुमन उसके साथ उसके साये की तरह थी| अगर सुमन उस मुसीबत की घड़ी में उसके साथ न होती तो न जाने क्या होता ...?

जानेवाला चला गया पीछे रह गई पत्नी और दो साल की मासूम बेटी सीमा| बेटी  जिसने अभी बाप के प्यार को सिर्फ महसूस ही किया था| रोहन एक कम्पनी में उच्च पद पर कार्यरत था| रोहन की आकस्मिक मृत्यु के कारण धीरे-धीरे घर की जमा पूंजी समाप्त होने लगी| परिवार के समक्ष आर्थिक संकट बढ़ रहा था....| सीमा अभी छोटी थी, उसकी पढ़ाई-लिखाई और उसके भविष्य के लिए उन लोगों ने जो सपने  देखे थे सब टूटते नजर आ रहे थे| सुनंदा ने इस संकट की घड़ी में धैर्य का साथ नहीं छोड़ा| वह पढ़ी-लिखी थी| घर के खर्च को चलाने के लिए उसने नौकरी करने का फैसला किया| रोहन के दोस्तों की सहायता से उसे एक कम्पनी में नौकरी मिल भी गई| कम्पनी में नौकरी तो मिल गई लेकिन सामने एक और समस्या मुँह उठाए खड़ी थी वह थी सीमा की देख-रेख| ऑफिस जाते समय वह सीमा को डे केयर बेबी सेंटर में छोड़ जाती| उसका सारा दिन ऑफिस में ही बीतता| वह सीमा को अधिक समय नहीं दे पाती थी| एक साल बाद सुनंदा ने सीमा का एडमिशन एक नामी स्कूल में करवा दिया था| उसका एक ही लक्ष्य था कि बेटी को सफल और आत्म निर्भर बनाना| घर पर वह उसे अधिक समय नहीं दे पाती थी| नौकरी करना उसकी मजबूरी थी| अगर वह नौकरी नहीं करेगी तो सीमा के भविष्य का क्या होगा?

बेटी का स्कूल में दाखिला तो करवा दिया लेकिन उसकी समस्याएं खत्म नहीं हुई थीं| अब  एक समस्या और थी कि स्कूल के बाद सीमा की देखभाल कौन करेगा? कौन उसे स्कूल की बस से लाएगा? कौन उसके खाने-पीने का प्रबंध करेगा? इस विषय के बारे में जब उसने सुमन से बात की तब सुमन ने सीमा के स्कूल के बाद की जिम्मेदारी ले ली| अब सुमन ही सीमा को स्कूल की बस से लेकर आती उसे उसका होमवर्क करवाती| उसकी देखभाल की सारी ज़िम्मेदारी वही निभा रही थी| जब से सुमन ने सीमा की स्कूल के बाद की ज़िम्मेदारी ली थी तब जाकर सुनंदा की चिंता खत्म हुई|
 समय अपनी तीव्र गति से चलता चला गया और मासूम सी दिखनेवाली नन्ही सीमा अब अपने जीवन के छब्बीस वर्षों को पूरा करने जा रही थी| इन छब्बीस वर्षों में सीमा ने अपनी कॉलेज की पढ़ाई खत्म कर ली थी| जवान होती बेटी को देखकर सुनंदा को उसके विवाह की चिंता भी सताने लगी| कैसे बेटी के हाथ पीले होंगे......? बेटी जब अपनी ससुराल चली जायेगी उसका क्या होगा? जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुकी सुनंदा अकसर इन्हीं ख़यालों में खोई रहती| इधर अपनी पढ़ाई खत्म कर चुकी सीमा नौकरी की तलाश में लगी हुई थी| कुछ समय बाद उसे एक आई. टी. कम्पनी में नौकरी मिल गई| बेटी की नौकरी की खबर सुनकर वह फूली नहीं  समा रही थी| खुशखबरी सुनकर उसकी आँखें छलक आईं|    
वृद्धा हो चुकी सुनंदा दो महीनों में कम्पनी से रिटायर्ड होने वाली थी| देखते-देखते वह दिन भी आ गया| जिस दिन कंपनी में उसका आखिरी दिन था| उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि आज उसका कम्पनी में आख़री दिन है| इन बीते तीस वर्षों में सब कुछ बदल चुका था| आज वह भी उस कम्पनी का अतीत बनने जा रही थी| शाम को सुनंदा के सहकर्मियों ने उसकी विदाई का कार्यक्रम रखा था| कार्यक्रम के बाद वह भारी मन से घर लौटी| एक तरफ बेटी की नौकरी की खुशी थी वहीं दूसरी तरफ अपने रिटायर्ड होने का दुःख| बार-बार यही सोचती कि घर में खाली बैठे-बैठे उसका समय कैसे कटेगा ...? साथ ही उसे इस बात की तसल्ली भी है कि उसकी इस मेहनत से उसकी बेटी अपने पैरों पर खड़ी हो सकी है| उसने अपने जीवन में जो संकल्प किया था वह काफी हद तक पूरा हो चुका था|

आई.टी. कम्पनी में नौकरी ज्वाइन करने के पश्चात से सीमा के रहन सहन के तरीकों में धीरे धीरे बदलाव आता जा रहा था| इस बदलाव को सुनंदा भी महसूस कर रही थी| पिछले दो वर्षों सदा जीवन उच्च विचार रखने वाली भोली-भाली सीमा आधुनिक सुख सुविधाओं की चकाचौंध में धीरे-धीरे गायब होती जा रही थी|     
आज हमारे समाज की नौजवान पीढ़ी जिस प्रकार आधुनिक सुख- सुविधाओं की ओर लालायित हो रही है| आज की पीढ़ी आधुनिक भोग विलासिता की चीजों में ही अपना सुख खोजने लगी है| उसे अपनी खुशी और अपने सुख में घर-परिवार के लोगों का सीमित स्थान मात्र रह गया है|   खैर यह सब छोड़ो हम बात कर रहे थे सीमा  की तो हाँ आज की इन भोग विलासिता की चीजों से भला सीमा कैसे दूर रह पाती| सीमा ने भी अपने सहकर्मियों के साथ डिस्कों पार्टियों में जाना  
सिगरेट पीना, शराब पीना शुरू कर दिया था| समय रहते उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने अपने आप को इस प्रकार की चीजों से धीरे-धीरे दूर करने लगी| ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जो समय रहते संभल पाते हैं|    
  
उसकी मुलाकात कंपनी में काम करने वाले अजीत से हुई| अजीत भी उसी टीम में काम करता था| अजीत की चुटकुले सी हँसोड़ बातें, उसके बात करने का तरीका  उसे भाने लगा। अजीत का व्यक्तित्व उसे बहुत आकर्षक लगा। ऊपर से वह बातूना और मज़ाकिया लगता पर अंदर से जैसे कोई बहुत बड़ा दार्शनिक,विद्वान हो। देखने में भी सुन्दर, गठीले बदन का नौजवान था|  कुछ महीने  उसके साथ काम करने के बाद उसने पाया कि धीरे-धीरे अजीत उसके दिलो दिमाग पर छाता जा रहा है| ऐसा नहीं था की केवल सीमा ही अजीत के प्रति यह लगाव महसूस कर रही थी| अजीत का भी यही हाल था| सीमा के मन में अपने होनेवाले पति के विषय में जो  कल्पना थी उसे अजीत में वह सब खूबियाँ दिखाई देती थीं| आखिर एक दिन दोनों ने अपने प्रेम का इज़हार एक दूसरे से कर ही दिया| अब हाल ये हो गया कि जब-तक दोनों मिलकर घंटों बातें नहीं कर लेते तब तक उन्हें चैन ही नहीं पड़ता। उन्हें ऐसा लगता कि दोनों एक-दूसरे को  जन्म-जन्मांतर से जानते हों। दोनों एक दूसरे के बिना एक पल भी नहीं रह सकते थे| दोनों एक दूसरे के इतने करीब आ चुके थे कि उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया|

सीमा ने कई बार अजीत से उसके माता-पिता, घर-परिवार के बारे में बात करनी चाही लेकिन वह हर बार इस बात को टाल जाता| सीमा ने अपने इस प्रेम-प्रसंग के विषय में अपनी माँ को कई बार बताने की कोशिश की पर एक अनजान डर के कारण कह न सकी| अगर माँ ने इस शादी के लिए अनुमति नहीं दी तो.......? इधर इन सब बातों से अंजान सुनंदा बेटी के सुनहरे भविष्य और एक योग्य वर की चिंता में रहती| जान-पहचान के लोगों से बेटी के लिए एक अच्छे लड़के की तलाश की बात करती| कुछ लोगों ने एक-दो लड़के बताए भी थे, उनमें से एक लड़का उसे सीमा के लिए पसंद भी आया| उनकी दहेज की मांग  इतनी थी जिसे वह पूरा नहीं कर सकती थी|

सीमा चाहती थी कि वे दोनों जल्दी ही कहीं डेट पर जाएं। पर इतनी अधीरता के बावजूद भी अजीत का दिल डेट के लिए तैयार नहीं था। सीमा को यह बात अजीब लगती। वह अजीत को बार-बार समझाती कि वे दोनों शादी करनेवाले हैं फिर डेट पर जाने से उसे इनकार क्यों है? अजीत उसे समझाता कि ‘वह अपनी माँ की अकेली संतान है उसे पहले अपनी माँ की सहमती लेनी चाहिए| उसकी शादी के लिए माँ को बहुत चाव होगा|’ अजीत की बातों के आगे सीमा को हार माननी पड़ती, ‘ठीक है बाबा, अब तुम जैसा कहोगे, मैं वैसा ही करुँगी। पर डर लगता है कि कहीं माँ ने हमारी शादी के लिए मना कर दिया तो...?

एक दिन सीमा ने हिम्मत करके अपने और अजीत के विषय में अपनी माँ से बात की और बताया की वह उसके शादी करना चाहती है| सीमा की बात सुनकर माँ को बुरा लगा पर फिर बेटी के खुशी के लिए उसने अपनी अनुमति दे दी| दूसरे दिन अजीत सीमा के घर उसकी माँ से मिलने पहुँच गया| घर पर सीमा की माँ ने खुल कर अजीत का साक्षात्कार लिया। वह अजीत की बौद्धिक प्रतिभा और अपनेपन से बहुत प्रभावित हुई। उन्हें अजीत होशियार, दूरदर्शी, आधुनिक मान्यताओं के साथ परिवार को अहमियत देने वाला सर्वगुण सम्पन्न युवक लगा। जब बात उसके माता-पिता के विषय में आई तो वह चुप हो गया| इस बात को वह टालना चाहता था लेकिन टाल न सका| बार-बार पूछे जाने पर उसने बताया कि ‘उसके माँ-बाप नहीं है| वह एक अनाथ है और उसकी परवरिश एक अनाथाश्रम में हुई है| उसने बताया कि जब से उसने होश संभाला है उसने अपने आप को अनाथाश्रम में पाया कहते-कहते उसकी आँखों से आंसू बह निकले|’ इतना कहकर वह वहाँ से चला गया| अजीत के अनाथ होने की बात सुनकर सुनंदा के दिल को एक धक्का लगा| अजीत और अनाथ ......

सीमा ने अजीत को रुकने के लिए आवाज़ दी लेकिन वह उसे अनसुना करके घर से बाहर निकल गया| यह सब देखकर सीमा की साँसे मानो रुक गई, उसके बदन का रेशा-रेशा थर्रा उठा। उसकी आँखें नम और गला घुटने लगा। खुद को संभालते हुए सीमा ने माँ से उनकी राय जाननी चाही| उसने माँ को बताया कि अजीत अनाथ अवश्य है पर वह एक खुद्दार और सच्चा इंसान है|   वह......वह उससे बहुत....बहुत प्यार करती है। अगर वह उसे नहीं मिला तो......कहकर वह अपने कमरे में चली गई| सुनंदा की समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि वह उसे क्या उत्तर दे| एक अनाथ को अपनी बेटी कैसे सौंप दे…. ना उसके माँ-बाप का पता ना खानदान का.....| काफी समय अपने मन में उठे द्वंद्व पर मंथन करते हुए खुद को संतुलित करते हुए एक गहरी साँस खींचते हुए उठी| सीमा के पास उसके कमरे में जाकर अजीत से साथ विवाह करने की अनुमति दे दी| वह नहीं चाहती कि उसकी बेटी भी वही कदम उठाए जो वर्षों पहले उसने उठाया था| माँ से अनुमति मिलने से वह फूली न समा रही थी| ऐसा लग रहा था कि अभी उड़कर अजीत के पास जाए और उसे यह खुशखबरी सुनाए|

दूसरे दिन जब अजीत को पता चला कि माँ ने दोनों के विवाह की अनुमति दे दी है| यह सुनकर उसकी आँखें छलक आई|  शाम को दोनों ने बाहर किसी पार्क में मिलने का प्रोग्राम  बनाया| शाम को दोनों पार्क में मिले सीमा सम्मोहित सी, समर्पित भाव से डूबते सूरज की रोशनी में उसे देखते हुए, उसके हर स्पर्श को, हर पल को, हर शब्द को अपने अंदर की गहराइयों में संजोती जा रही थी क्या सचमुच यह, वही अजीत है जिसे वह पिछले कई महीनो से देख रही थी... आज वह अपने असीम प्रेम और लगाव को किस कुशलता और खूबसूरती से अभिव्यक्त कर रहा है। आज अजीत को सीमा का,  उसके प्यार में मदहोश हो जाना अच्छा लग रहा था। यही तो वह चाहता था। सही मायनों में आज से सीमा उसकी है| वह सीमा की हर एक साँस में समा चुका है। सीमा के प्यार में डूब जाना ही आज उसका मुख्य लक्ष्य है। ढलते सूरज के साथ-साथ अँधेरा बढ़ता जा रहा था तभी अजीत ने कहा ‘अब हमें घर चलना चाहिए, कल ऑफिस भी जाना है!सीमा ने अपनी घड़ी देखी फिर मन ही मन  सोचने लगी। यह तो हमारी पहली डेट है। अभी-अभी तो हम लोग आए हैं जल्दी क्या है....? कुछ समय बाद दोनों वहां से घर को निकले|
घर आकर नींद से बोझिल आँखों में अजीत  के सपने लिए सीमा बिस्तर पर ढह गई। सुबह जब आँख खुली तो नौ बज चुके थे।


कुछ महीनों बाद सुनंदा ने शुभ मुहुर्त दिखवाकर दोनों की शादी करवा दी| बेटी अपने घर चली गई| बेटी ने उसे अपने साथ अपने नए फ्लैट में साथ रहें के लिए कहा लेकिन वह उसके साथ गई नहीं| जिस घर में वह रह रही है उस घर से उसके अतीत की खट्टी मीठी यादें जुडी हैं| यह घर उसके पति की आख़िरी निशानी है| अपने जीते जी वह इस घर को नहीं छोड़ना चाहती| उसकी इच्छा है कि उसकी अंतिम सांस इसी घर में हो ...... 

3 comments:

  1. नमस्कार शिवकुमार जी

    सर्वप्रथम आपको इस रचना के लिए हार्दिक बधाई। आपकी यह रचना पढ़ कर बहुत अच्छा लगा।

    आपसे अनुरोध हैं कि ऐसी अच्छी रचनायें कृपया अपने ब्लॉग पर डालते रहे, ताकि आपके पाठकगण आपकी रचनाएँ पढने के लिए बोल उठे। ।आ अब लौट चले ,,,,,,, शिवजी के ब्लॉग पर :-)


    धन्यवाद्
    आपके नियमित पाठक
    अमित अनुराग हर्ष

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  2. बधाई,बंधुवर.
    नियमितता बनी रहनी चाहिए.

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  3. It is really an amazing story, thanks for that. I liked it and I'm waiting for some more.
    I wish you all the very best for your upcoming stories.

    Regards

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